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Monday, March 9, 2020

भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी में गिरावट आई है - India's female labour force is declining: UNGC

संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पेक्ट (UNGC) अध्ययन के अनुसार, 153 सर्वेक्षण वाले देशों में भारत एकमात्र देश है जहां आर्थिक लिंग अंतर राजनीतिक अंतर से बड़ा है। भारत में महिला श्रम-बल की भागीदारी 2006 में 34% से घटकर 2020 में 24.8% हो गई है।
female Labour force
According to the United Nations Global Compact study, among 153 surveyed countries, India is the only country where the economic gender gap is larger than the political gap. Women's labor force participation in India has declined from 34% in 2006 to 24.8% in 2020.

Why is female labor force participation declining in India?

महिला श्रम शक्ति भागीदारी

महिला श्रम शक्ति भागीदारी (Female labor force participation) विकास और वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक (और परिणाम) है।
महिलाएं गरीबी के कारण विकासशील देशों में श्रम शक्ति (labor force) में भाग लेती हैं और महिलाओं की भागीदारी विभिन्न आर्थिक और सामाजिक कारकों का परिणाम है।

कामकाजी उम्र की महिलाओं के बीच अनुमानित श्रम शक्ति भागीदारी दरों में हालिया तेज गिरावट के लिए कई कारक जिम्मेदार थे।
कुछ कारक, जैसे शिक्षा और उच्च घरेलू आय के स्तर में उपस्थिति बढ़ जाती है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह तेजी से आर्थिक विकास का सकारात्मक प्रतिबिंब है।

महिला श्रम शक्ति की भागीदारी महत्वपूर्ण क्यों है?

जैसे ही अधिक महिलाएं श्रम बल में प्रवेश करती हैं, उच्च श्रम आदानों की प्रतिक्रिया में अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ सकती हैं।
श्रम शक्ति भागीदारी का विश्लेषण करने के अलावा, महिलाओं के रोजगार की प्रकृति को देखना भी महत्वपूर्ण है।
सामान्य तौर पर, जब महिलाएं काम करती हैं, तो उन्हें कम वेतन दिया जाता है और कम-उत्पादकता वाले कामों में लगाया जाता है।

भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी में गिरावट आई है : संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट

संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पेक्ट (United Nations Global Compact) ने एक अध्ययन में पाया है कि महिला श्रम भागीदारी (female labor participation) 2006 में 34% थी जो 2020 में घटकर 24.8% हो गई है।

संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पेक्ट (UNGC) ने भ्रष्टाचार-विरोधी (Anti corruption), मानवाधिकारों (Human rights), पर्यावरण (Environment) और श्रम (Labor) पर 10 सिद्धांत दिए हैं। 
यह सिद्धांत व्यवसायों (businesses) को व्यापक रूप से प्रोत्साहित करता है कि सामाजिक रूप से जिम्मेदार नीतियों को अपनाया जाऐ ।

इस अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 153 देशों में से भारत एकमात्र देश है जहाँ आर्थिक लिंग भेद (economic gender gap) राजनीतिक अंतर (political gap) से अधिक है।

इस अध्ययन में कहा गया है कि भारत में सार्वजनिक नीतियों (public policies) और कॉर्पोरेट नीतियों (corporate policies) को प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

यह जानना जरुरी है कि भारत में, 1990 में महिला श्रम शक्ति की भागीदारी 35% से गिरकर 2018 में 27% हो गई थी। भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान (जहां इसी अवधि में 14% से 25% तक की दर से वृद्धि हुई है) की तुलना में बेहतर है। लेकिन यह विकास के समान चरणों में बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल और अन्य देशों से पीछे है।

इस अध्ययन के मुताबिक, यदि महिलाओं की श्रम भागीदारी (Labour force participation) पुरुषों के सामान हो जाए, तो देश की जीडीपी में 27% की वृद्धि हो जाएगी। 

वैश्विक स्तर पर 38.7% महिलाएं कृषि, वानिकी (Forestry) और मछली पालन (fish farming) के क्षेत्र में काम कर रही हैं। जबकि, उनमें से केवल 13.85% ही भूमिधारक (Land holders) हैं।

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