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Tuesday, March 10, 2020

फेक न्यूज (Fake News) क्या है? भारत में फेक न्यूज़ की समस्या क्यों बढ़ रही है?

भारत में फेक न्यूज़ की समस्या क्यों बढ़ रही है?
भारत में मीडिया के माध्यम से फैलने वाली फेक न्यूज एक गंभीर समस्या बन गई है। 2019 फर्जी खबरों का साल था। सोशल मीडिया और दूसरे संचार चैनलों पर गलत सूचना प्रसारित करने के कारण भीड़ की हिंसा और दंगे हुए हैं। व्हाट्सएप (WhatsApp) भारत में फेक न्यूज और झूठी खबरों का सबसे बड़ा साधन बन गया है।
Fake news
Fake news spread through the media has become a serious problem in India. 2019 was a year of fake news. There has been mob violence and riots due to disseminating misinformation on social media and other communication channels. WhatsApp has become the biggest tool for fake news and misleading information in India.

What is Fake News and Why is fake news problem increasing in India?

क्या है फेक न्यूज? What is Fake News?

फेक न्यूज (जंक न्यूज, छद्म समाचार, या होक्स न्यूज के रूप में भी जाना जाता है) एक प्रकार का समाचार है जिसमें पारंपरिक समाचार मीडिया (प्रिंट और ब्रॉडकास्ट) या ऑनलाइन सोशल मीडिया के माध्यम से जानबूझकर फैलाऐ गए दुष्प्रचार, छलावा या झांसे शामिल हैं।

डिजिटल समाचार ने फेक न्यूज, सनसनीखेज पत्रकारिता या पीत पत्रकारिता (Yellow journalism) के उपयोग को बढ़ा दिया है।
पीत पत्रकारिता वह पत्रकारिता है जिसमें सही खबरों को नजर अंदाज करके सनसनीखेज खबरों या ध्यान खींचने वाली शीर्षकों का इस्तेमाल बहुतायत में किया जाता है।

समाचारों को अक्सर सोशल मीडिया में गलत सूचना के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है लेकिन कभी-कभी मुख्यधारा के मीडिया भी इसका प्रयोग करते हैं। जैसे कि आज के भारत में मुख्यधारा की मीडिया चाटुकारिता करने के लिए फेक न्यूज और पीत पत्रकारिता का बड़े पैमाने पर प्रयोग कर रही है।

एक एजेंसी, इकाई, या व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने और / या आर्थिक रूप से या राजनीतिक रूप से लाभ पहुंचाने के लिए, आमतौर पर सनसनीखेज, भ्रामक, या एकमुश्त गढ़ी गई सुर्खियों का उपयोग करके नकली खबर लिखी और प्रकाशित की जाती है, ताकि वे अपनी योग्यता को बढ़ा सकें।
इसी तरह, क्लिकबैट कहानियां और हेडलाइंस इस गतिविधि से विज्ञापन राजस्व कमाते हैं।

भारत में असत्य समाचार (Fake news) की समस्या

भारत में असत्य समाचार या जाली समाचार (fake news)  का मतलब देश में गलत सूचना, झूठी खबर से है जो आम तैर से पारंपरिक मीडिया के माध्यम से फैली हुई है और हाल ही में संचार के डिजिटल रूपों जैसे कि संपादित वीडियो (edited videos), मेम (memes), असत्यापित विज्ञापन (unverified advertisements) और सोशल मीडिया प्रचार अफवाहों के माध्यम से फैलती है।

देश में सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली फेक न्यूज एक गंभीर समस्या बन गई है, इसकी संभावना के परिणामस्वरूप भीड़ की हिंसा हुई, जैसा कि 2018 में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप सोशल मीडिया पर गलत सूचना प्रसारित की गई थी।

भारत जैसे समाज में विघटन की समस्याएँ अधिक परिष्कृत और वे पश्चिम की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
भारत में इंटरनेट की पहुंच में वृद्धि के कारण सोशल मीडिया पर नकली समाचारों के कारण होने वाली क्षति में वृद्धि हुई है। 
2012 में 137 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से 2019 में 600 मिलियन से अधिक हो गई है।

भारत में फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, शेयरचैट और टिक्कॉट जैसे प्लेटफार्मों पर दुनिया में सबसे अधिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से फैली हुई झूठी कहानियाँ, अफवाहें और अभद्र भाषा देश में भीड़ के हमलों और हिंसा की विभिन्न घटनाओं से जुड़ी हुई हैं।

भारत 230 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ व्हाट्सएप का सबसे बड़ा बाजार है, और इसके परिणामस्वरूप मुख्य प्लेटफार्मों में से एक है, जिस पर फर्जी खबर फैली हुई है।

मुख्य समस्याओं में से एक रिसीवर्स का है जो जागरूकता की कमी के कारण सोशल मीडिया पर भेजे गए किसी भी चीज़ पर विश्वास करता हैं।

भारत में मन घड़त खबरों के लिए टेलीविजन का भी बहुत बड़ा रोल है कुछ न्यूज चैनल हैं जिनका काम ही झुटी खबर और गलत सूचना बनाना और उसका परसार करना है जैसे Zee News और भी दुसरे गोदी मीडिया जो हर दिन कोई न कोई झूटी खबर फैलाते हैं और जनता को असली मुददे से भटकाने का काम करते हैं इनके डिबेट का जयादा तर टौपिक हिंदु मुसलिम के बीच नफरत फैलाना होता है जिस नफरत के कारण भारत में आए दिन दंगे फसाद होते रहते हैं।

झूठी खबर और नकली समाचारों के प्रसार और प्रभाव को रोकने के लिए विभिन्न पहल और अभ्यास शुरू किए गए हैं।

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